ओम कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने प्रणत:। क्लेश नाशाय गोविन्दाय नमो नमः।।

त्योहारों की खुशियों पर मिठाईयां बांटें, शराब नहीं


 त्योहारों की खुशियों पर मिठाईयां बांटें, शराब नहीं 

करमा/सोनभद्र। त्योहारों की खुशियों पर गांव घर मोहल्ले में मिठाइयां बाटें, परंतु शराब से परहेज करें, और औरों को भी शराब न बांटने की नसीहत देते हुए औरों को भी प्रेरित करें,अक्सर समाज में यह देखा जाता है कि जब कोई त्योहार आता है तो बड़े कद काठी के लोग व अन्य क्षेत्रों के समाज सेवियों द्वारा अपनी छमता नुसार  त्योहारी के नाम पर शराब या अन्य नशीले पदार्थ लेते हैं व और दोस्त मित्रों में वितरित भी करते हैं। क्या इसी को समाज सेवा कहते हैं ? समाज सेवा बहुत अच्छी बात है, लेकिन हमारे विचार में यह त्योहार मनाने का कैसा तरीका है? कि नशे में धूत हो जाय या किसी को करा दे, जिससे नशा करने वाला व करने वाला स्वयं अपनी बीवी बच्चों को पहचान करने से भूल जाते हैं, समाज सेवा तो ऐसा होना चाहिए जिससे आप के सहयोग से किसी के घर चुल्हा जले, किसी को रोटी मिल जाय, वस्र हीन को वस्त्र मिल जाय ,नंगे पाव को पादुका मिल जाय ,पर्व को मनाने के लिये सहयोग मिल जाय ,अक्सर आधे से ज्यादा छोटे छोटे विबाद नशे के कारण हो रहे हैं, जिससे पुलिस को भी हस्तक्षेप करना पड़ता है, शराब स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, इसका सभी को प्रचार- प्रसार करना चाहिए तथा स्वयं भी अमल करना चाहिए। रक्षाबंधन पर्व पर आप सभी को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं

चंद्र मोहन शुक्ला, ब्यूरो प्रभारी दैनिक बुध्द का संदेश, Delhi 34 new जनपद - सोनभद्र

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