ओम कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने प्रणत:। क्लेश नाशाय गोविन्दाय नमो नमः।।

गैंगस्टर एक्ट: दोषी गैंग लीडर समेत दो को 10-10 वर्ष की कठोर कैद

 


गैंगस्टर एक्ट: दोषी गैंग लीडर समेत दो को 10-10 वर्ष की कठोर कैद


* 10-10 हजार रूपये अर्थदंड , अर्थदंड न देने पर दो-दो माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी 

* जेल में बिताई अवधि सजा में समाहित की जाएगी

* करीब पांच वर्ष पूर्व गैंगेस्टर एक्ट में दर्ज हुआ था मुकदमा

सोनभद्र। करीब पांच वर्ष पूर्व दर्ज हुए गैंगेस्टर एक्ट के मामले में विशेष न्यायाधीश गैंगेस्टर कोर्ट सोनभद्र अर्चना रानी की अदालत ने बुधवार को सुनवाई करते हुए दोषसिद्ध पाकर दोषी गैंग लीडर एजाज उर्फ आशिक व सक्रिय गैंग सदस्य शोएब को 10-10 वर्ष की कठोर कैद एवं 10-10 हजार रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर दो-दो माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। जेल में बिताई अवधि सजा में समाहित होगी। 

अभियोजन पक्ष के मुताबिक प्रभारी निरीक्षक नवीन कुमार तिवारी ने 2 नवंबर 2020 को थाने में दी तहरीर में अवगत कराया था कि एक नवंबर 2020 को पुलिस बल के साथ देखभाल क्षेत्र में था तो पता चला कि एजाज उर्फ आशिक पुत्र जाकिर हुसैन निवासी प्रीतनगर, थाना चोपन, जिला सोनभद्र का एक सक्रिय गैंग है, जिसका वह गैंग लीडर है। इसके अलावा गैंग का सक्रिय सदस्य शोएब पुत्र यूनुस निवासी प्रीतनगर, थाना चोपन, जिला सोनभद्र शामिल है। इनके विरुद्ध दूसरे धर्म की लड़कियों को जाल में फंसाकर यौन संबंध बनाने के साथ ही धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने, सफलता न मिलने पर हत्या करने समेत कई मुकदमा विचाराधीन है। जिससे महिलाएं और लड़कियां घर से बाहर नहीं निकलती हैं। लोगों में भय पैदा कर आर्थिक लाभ हेतु कार्य करना इनका एकमात्र कार्य है। यहीं वजह है कि इनके विरुद्ध कोई भी मुकदमा लिखवाने अथवा गवाही देने की जुर्रत नहीं करता है। जिसकी वजह से इनका वर्चस्व कायम है। इस तहरीर पर 2 नवंबर 2020 को चोपन थाने में गैंगस्टर एक्ट में एफआईआर दर्ज किया गया था। विवेचना के उपरांत पर्याप्त सबूत मिलने पर विवेचक ने कोर्ट में गैंग लीडर एजाज उर्फ आशिक एवं सक्रिय सदस्य शोएब के विरूद्ध चार्जशीट दाखिल किया था। 

मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्को को सुनने, गवाहों के बयान एवं पत्रावली का अवलोकन करने पर दोषसिद्ध पाकर दोषी गैंग लीडर एजाज उर्फ आशिक और सक्रिय सदस्य शोएब को 10-10 वर्ष की कठोर कैद एवं 10-10 हजार रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर दो-दो माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। जेल में बितायी अवधि सजा में समाहित होगी। अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी वकील धनंजय शुक्ला ने बहस की।

Delhi 34 news report by Rajesh Kumar Pathak senior advocate

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