अब नहीं होगा पेयजल संकट, सिंचाई को भी मिलेगा भरपूर पानी


योगी सरकार ने कनहर सिंचाई परियोजना पर तेजी से कराया काम

किसानों की आर्थिक समृद्धता के खुलेंगे द्वार, बांध का निर्माण पूरा, नहर का निर्माण कार्य अंतिम चरण में

सोनभद्र। जिले के दुद्धी तहसील में निर्माणाधीन कनहर सिंचाई परियोजना से अगले वर्ष किसानों को पानी मिलने लगेगा। इस परियोजना से दुद्धी और ओबरा के 108 गांवों के हजारों किसान लाभान्वित होंगे। किसानों की पेयजल व सिंचाई संबंधी आवश्यकतओं की पूर्ति के लिए इस परिजयोजना की शुरूआत तो काफी पहले हुई थी, लेकिन परियोजना के निर्माण ने रफ्तार प्रदेश की योगी सरकार के कार्यकाल में पकड़ी। सरकार की प्राथमिकता के अनुसार जिला प्रशासन ने भूमि अधिग्रहण संबंधी तमाम आपत्तियों को युद्ध स्तर पर दूर करते हुए बांध व नहर का निर्माण सुनिश्चित किया। अब जहां बांध का निर्माण पूरा हो चुका है वहीं नहर बनाने का कार्य भी अंतिम चरण में है।  

 जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने बताया कि निर्माण से जुड़े अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि परियोजना को दिसंबर 2026 के अंत तक हर हाल में पूरा करना है। ताकि जनवरी 2027 से किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सके। उन्होंने बताया कि यह परियोजना मुख्यत: कनहर और पांगन नदी के संगम पर स्थित है। जहां वर्षा जल संचयन के लिए 3.24 किमी. लंबा एव 39.9 मीटर ऊंचे बांध का निर्माण पूर्ण हो चुका है।

परियोजना तेजी से पूरी की जा सके इसके लिए प्रदेश की योगी सरकार ने परियोजना की द्वितीय पुनरीक्षित लागत 3394.65 करोड़ रुपये स्वीकृत की है। जिलाधिकारी ने बताया कि दुद्धी व चोपन ब्लॉक में प्रतिवर्ष 35467 हेक्टेयर क्षेत्र की सिंचाई के लिए किसानों को जल उपलब्ध हो सकेगा। इसके साथ ही 2 लाख की आबादी को पेयजल भी उपलब्ध होगा। इस परियोजना के पूर्ण होने से किसानों की समृद्धि के द्वार खुल जाएंगे। एक ओर जहां उनकी पेयजल की समस्या दूर होगी वहीं दूसरी ओर सिंचाई के लिए जल की उपलब्धता से आर्थिक रूप से भी सशक्त होंगे। बताया कि बांध से किसानों के खेतों तक जल पहुंचाने वाली नहर प्रणाली की कुल लंबाई 248.810 किमी. है। जबकि परियोजना से जुड़ी मुख्य नहर की लंबाई 57.10 किमी. है। 

पहले बिना उपयोग किए ही बह जाता था वर्षा जल, अब हो रहा संचय

 इस परियोजना के अंतर्गत कनहर, पांगन, सुखरी पांगन, लउवा, ठेमा, पाण्डु, गोइठा व धोरपा आदि नदियों का क्षेत्र आता है। जिनकी कुल लम्बाई लगभग 650 किमी.है। इनमें मुख्यतः कनहर, पांगन व सुखरी पांगन नदियां छत्तीसगढ़ राज्य के पठारों से निकलकर उत्तर प्रदेश के सोनभद्र से होते हुए सोन नदी में जाकर मिल जाती हैं और सोन नदी जो पटना में जाकर गंगा नदी में मिल जाती है। ये नदियां उत्तर प्रदेश के सोनभद्र क्षेत्र में जल आवश्यकताओं की पूर्ति करने में महत्वपूर्ण भूमिका रखती हैं। सोनभद्र जनपद की भौगोलिक स्थिति पठारी होने के कारण नदियों का वेग वर्षाकाल में अत्यधिक होता है, जिसके कारण इनका अधिकांश जल बिना उपयोग के बह जाता है। इस क्षेत्र में भू-गर्भ जल स्तर भी बहुत नीचे है। जिससे यहां के वासियों को ग्रीष्मकाल में भयंकर जल का सामना करना पड़ता है। लेकिन अब इस परियोजना के पूर्ण हो जाने से जल का संचयन हो रहा है जो किसानों के काम आएगा।

पानी बढ़ने पर स्वत: खुलेंगें बांध के गेट

कनहर निर्माण खंड-3 के अधिशासी अभियंता विनोद कुमार ने बताया कि कनहर बांध को आधुनिक तकनीक से बनाया गया है। बांध के स्पिलवे में 16 रेडियल गेट लगाए गए हैं। बांध में पानी बढ़ने पर अलार्म सिस्टम एक्टिवेट हो जाएगा और बांध के गेट आवश्यकतानुसार अपने आप खुल जाएंगे तथा बांध में पानी कम होते ही बांध के गेट स्वत: बंद भी हो जाएंगे। बताया कि परियोजना के तहत 1775 मीटर लंबाई का एक्वाडक्ट व 2660 मीटर लंबी सुरंग का निर्माण कार्य भी कराया जा रहा है जो अंतिम चरण में है।

Delhi 34 news report by chandra mohan Shukla