ओम कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने प्रणत:। क्लेश नाशाय गोविन्दाय नमो नमः।।

पार्थ के गांडीव की टंकार है कविता: प्रद्युम्न त्रिपाठी

 


पार्थ के गांडीव की टंकार है कविता: प्रद्युम्न त्रिपाठी


- गणतंत्र दिवस पर धर्मा फाउंडेशन नशा मुक्ति केंद्र पर कवि सम्मेलन का हुआ आयोजन

सोनभद्र। धर्मा फाउंडेशन नशामुक्ति केन्द्र सोनभद्र अरुण प्रकाश पाठक के द्वारा आयोजित गणतंत्र दिवस के अवसर पर कवि सम्मेलन व सामूहिक भोज का आयोजन संयोजक ओमप्रकाश पाठक द्वारा किया गया जहाँ समस्त अतिथियों कवियों को अंगवस्त्र, माल्यार्पण, प्रतीक चिह्न देकर अभिनंदन किया गया। दीप प्रज्ज्वलित कर मां के स्तवन पश्चात मेघ दिवाकर दिवेदी ने वाणी वंदना किया। 

प्रदुम्न त्रिपाठी एड शहीद स्थल करारी ने पार्थ के गांडीव की टंकार है कविता, समता सदभाव प्यार है कविता, भूखे को देती भोजन, प्यासे को देती पानी, सीमां की निगहबान‌ पहरेदार है कविता सुनाकर महफ़िल को लूट लिया सराहे गये। प्रभात सिंह चंदेल ने सफल संचालन करते हुये, मेरे मस्तक पर हिंदुस्तान लिख देना सुनाकर ओज को परिभाषित किया। कौशल्या कुमारी चौहान ने, मुझको अबला मत समझो मैं झांसी वाली रानी हूँ सुनाकर राष्ट्र अनुराग जगाया। दिलीपसिंह दीपक ने तुम सब कुछ बेंच दो लेकिन हिंदुस्तान मत बेचो सुनाकर सत्ता को नसीहत दी। शायर अशोक तिवारी ने मैने तुमसे प्यार किया और क्या किया। धर्मेश चौहान ने बडा़ ही सुंदर मेरा प्यारा हिंदुस्तान मेघ दिवाकर दिवेदी ने आदमी बनने की तमीज को अभिव्यक्ति दी तो वहीं अजय चतुर्वेदी कक्का ने, देश को मत खाई में ठेल यूजीसी पर सशक्त हास्य व्यंग्य के माध्यम से शासन के निर्णय को चुनौती दी। विवेक चतुर्वेदी ने गंभीर शायरी कर लोगों को झकझोरा तो वहीं अध्यक्षता करते हुए गीतकार ईश्वर विरागी ने जागरण कर, एकता के गीत गुनगुनायें हम, देश में नव विहान लायें हम सुनाकर खूब तालियां बटोरी। सराहे गये। इस अवसर पर सदर विधायक भूपेश चौबे, कांग्रेस के राजेश दिवेदी, मृदुल मिश्रा, भाजपा नेता अजीत चौबे, धर्मवीर तिवारी, अशोक मिश्रा, रमेश मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार विजय शंकर चतुर्वेदी, बार अध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव एड, महामंत्री योगेश कुमार दिवेदी एड, महेन्द्र शुक्ल, कल्लू पाठक एडवोकेट, जयशंकर त्रिपाठी, सनोज तिवारी, राहुल श्रीवास्तव आदि लोग देर रात तक जमे रहे।

Delhi 34 news report by Rajesh Kumar Pathak senior advocate

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